किसान और व्यापारी भाइयों, सरसों की कीमतों में इस सीजन का हाईएस्ट रिकॉर्ड 8000 का बन चुका है। शनिवार को जयपुर मंडी में सरसों का भाव 75 रुपये बढ़कर 8000 के आंकड़े पर पहुँच गया है। इस हफ्ते के दौरान जयपुर मंडी में सरसों का भाव 450 से 500 रुपये तक तेज हुआ है। वहीं भरतपुर मंडी की बात करें तो भाव 400 रुपये बढ़कर शनिवार को 7620 पर बंद हुआ था। सुमेरपुर मंडी में भी इस हफ्ते 400 रुपये की तेजी दर्ज की गई और शनिवार को भाव 7860 पर बंद हुआ है। प्लांटों की बात करें, सलोनी प्लांट में सरसों का भाव 300 से 400 रुपये बढ़कर 8710 पर पहुंच गया है। वहीं गोयल कोटा प्लांट पर भाव 300 रुपये तेज हुआ और भाव 7800 पर पहुंच गया है। इसी दौरान शनिवार को ऑल इंडिया सरसों की आवक में 1.5 लाख बोरी की गिरावट दर्ज की गई और आवक 7 लाख बोरी की हुई। इस हफ्ते सरसों तेल के बाजारों में 60 से 80 रुपये प्रति 10 किलो की शानदार तेजी दर्ज की गई है, जिसमें अगर एक्सपेलर तेल (प्रति 10 किलो) की बात करें तो इस हफ्ते में जयपुर में यह ₹70 की मजबूती के साथ ₹1536, दिल्ली में ₹70 की बढ़त के साथ ₹1555, चरखी दादरी में ₹65 तेज होकर ₹1535 और मुरैना में ₹65 के उछाल के साथ ₹1545 पर पहुँच गया है; वहीं दूसरी ओर सरसों तेल कच्ची घानी (प्रति 10 किलो) के दामों में भी जोरदार उछाल देखा गया, जहाँ जयपुर और बूंदी दोनों जगहों पर भाव ₹70 की तेजी के साथ ₹1556, मुरैना में ₹70 की बढ़त के साथ ₹1560, गंगानगर में सबसे ज्यादा ₹80 की तेजी के साथ ₹1580 और भरतपुर में भी ₹80 की मजबूत बढ़त के साथ ₹1570 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। जैसा कि हमने आपको बताया था सरसों तेल की कीमतें 1550 के स्तर तक जा सकती हैं, वैसा ही देखने को मिला है। अब आगे की चाल पर नजर डालें तो मांग में मजबूती के चलते निकट भविष्य में 40-50 रुपये प्रति 10 किलो तक और बढ़ सकते हैं। सरसों खल का बाजार इस हफ्ते 3250 से 3300 की रेंज में ही अटका रहा क्योंकि ऊँची कीमतों के कारण पशु आहार वालों की मांग जरूरत के अनुसार ही चल रही है, लेकिन आगे के भविष्य पर नजर डालें तो सरसों के स्टॉक की कमी को देखते हुए और आगे सरसों तेल से समर्थन मिलने की संभावना से सरसों खल की कीमतें 3500 रूपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंच सकती हैं। सरसों के आगे के बाजार पर नजर डालें तो मंडियों में कम आवक और तेल मिलों की मजबूत मांग के चलते इसमें तेजी का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है, क्योंकि पिछले साल के मुकाबले इस बार स्टॉक काफी कम है और बचा हुआ स्टॉक अब किसानों के पास से निकलकर अब बड़े स्टॉकिस्टों और व्यापारियों के हाथों में पहुँच चुका है जो इसे दिवाली तक रोककर रखने के मूड में हैं। साथ ही सरकार के पास भी कोई स्टॉक न होने से बाजार पर बिकवाली का कोई दबाव नहीं है और ये सारे समीकरण फिलहाल सरसों में बढ़त की तरफ ही इशारा कर रहे हैं जिससे मौजूदा स्तरों से ₹200 से ₹300 प्रति क्विंटल तक की और तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे में अगर जयपुर मंडी में सरसों के दाम ₹8000 के ऊपर निकल जाते हैं तो भाव ₹8250 के स्तर को भी पार कर सकते हैं, हालांकि बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए मुनाफावसूली होने की भी पूरी संभावना नजर आ रही है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे
लगातार तीसरे हफ्ते चना के बाजार में आई 150 से 200 तक की तेजी
किसान और व्यापारी भाइयो चना बाजार में पिछले तीन सप्ताह से लगातार बढ़त का माहौल बना हुआ है और अब बाजार में फिर से तेजी की भावना बनती नाजा आ रही है क्योंकि मंडियों में घटती आवक, किसानों व व्यापारियों द्वारा कम माल बेचना और सरकार द्वारा ₹5875 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लगातार की जा रही सक्रिय खरीद ने बाजार को बड़ा सहारा दिया है। इसी के चलते दिल्ली चना बाजार में इस हफ्ते करीब ₹200 से ₹225 प्रति क्विंटल का जोरदार उछाल देखने को मिला और शनिवार को शेखावाटी लाइन ₹5975/6000, एमपी लाइन ₹5925/5950 व राजस्थान लाइन ₹5950/5975 के स्तर पर बंद हुई, हालांकि इसी हफ्ते के दौरान चना बाजार ₹6000 के स्तर को छूने के बाद ₹100 से ₹150 तक टूट भी गया था, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण दिल्ली में लगातार दो दिन सिर्फ 1-1 ट्रक (मोटर) माल आने से इस तेजी को फिर से सहारा मिल गया। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश की अन्य मुख्य मंडियों में भी क्वालिटी के हिसाब से देसी चने के दाम ₹100 से ₹150 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए हैं, पर दिल्ली का बाजार बाकी जगहों से ज्यादा तेज रहा जिसकी बड़ी वजह ट्रांसपोर्ट हड़ताल से सप्लाई का ठप होना और बाजार में बढ़ी सट्टेबाजी को माना जा रहा है, और इसी सीमित सप्लाई के चलते खरीदारों को लगातार ऊंचे दामों पर सौदे करने पड़े जिसने बाजार की तेजी को और पकड़ मिली। भले ही चने की कीमतों में लगातार मजबूती देखी जा रही है, लेकिन चने की दाल और बेसन की मांग फिलहाल उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है, क्योंकि दाल मिल मालिकों का मानना है कि देश के कई इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल कम हुआ है, खासकर गर्म मौसम में मांग कमजोर रहने के कारण बेसन की खपत अपने सामान्य स्तर पर नहीं पहुँच पा रही है और कारोबारियों का कहना है कि जब तापमान थोड़ा कम होगा, तभी दाल और बेसन की मांग में धीरे-धीरे सुधार आ पाएगा। दूसरी तरफ, डीजल और पेट्रोल के बढ़ते दाम भी चने के बाजार को पर्दे के पीछे से सहारा दे रहे हैं, क्योंकि माल-भाड़ा (परिवहन लागत) बढ़ने की वजह से खुदरा बाजार में चने और इसके अन्य उत्पादों की लागत बढ़ना बिल्कुल तय है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को मिलने वाली कीमतों पर भी साफ़ दिखाई दे सकता है। चना बाजार की मौजूदा स्थिति को देखें तो इसकी सबसे बड़ी ताकत मंडियों में माल की लगातार कम होती उपलब्धता बनती जा रही है, क्योंकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में सरकारी खरीद केंद्रों पर बड़ी मात्रा में चना चले जाने और इस सीजन में स्टॉकिस्टों द्वारा भारी मात्रा में माल खरीदकर रोकने की वजह से खुले बाजार में चने की सप्लाई लगातार घट रही है। ठीक ऐसी ही स्थिति राजस्थान में भी बनी हुई है जहाँ मंडियों में चने की दैनिक आवक लगातार कम हो रही है, और सरकारी खरीद जारी रहने के कारण व्यापारियों तथा दाल मिलों को अपनी जरूरत के मुताबिक आसानी से पर्याप्त माल नहीं मिल पा रहा है। अगर हम पूरे सीजन की आवक और बाजार की चाल को समझें तो अब यह साफ संकेत मिलने लगे हैं कि देश में चने का वास्तविक उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम रह सकता है, और यही वजह है कि बाजार में लंबे समय तक मज़बूती और तेजी बने रहने का भरोसा धीरे-धीरे और ज्यादा पक्का होता जा रही है। आने वाले महीनों में बाजार की पूरी नजर चने की मांग पर टिकी हुई है, क्योंकि आमतौर पर जून से सितंबर के बीच त्योहारों, मानसून और घरेलू खपत बढ़ने से चना और चना दाल की मांग सबसे ज्यादा रहती है; ऐसे में अगर मंडियों में माल की आवक कम रहती है और सरकारी खरीद का असर बना रहता है, तो बाजार को आगे भी अच्छा सहारा मिलता रहेगा। अब दिल्ली में चने का भाव ₹6000 के स्तर को पार कर लिया है और अब के हालात को देखते हुए नया लक्ष्य ₹6200 से ₹6500 प्रति क्विंटल तक माना जा रहा है, हालांकि लंबे समय में बाजार किस तरफ करवट लेगा, यह काफी हद तक सरकार की बिकवाली की नीति और इस साल के मानसून पर निर्भर करेगा, इसलिए तेजी के इस माहौल में व्यापारियों और स्टॉकिस्टों को सलाह दी जाती है समय-समय पर मुनाफावसूली करते चले और गिरावट पर खरीद 150 से 200 तक की गिरावट पर खरीद करते चले। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।
सोयाबीन 8000 के ऊपर निकलने पर हो सकता है तेजी का नया दौर शुरू
किसान और व्यापारी भाइयों, सोयाबीन की कीमतों में जबरदस्त तेजी के बाद इस हफ्ते 100 से 200 रुपये की मुनाफावसूली देखने को मिली लेकिन हफ्ते के अंत तक सोयाबीन की कीमतों में फिर से तेजी बननी शुरू हो चुकी है। शनिवार को महाराष्ट्र के कीर्ति प्लांट पर सोयाबीन की कीमतों में 150 रुपये की तेजी दर्ज की गई और भाव 7900 पर पहुंच गया जो कि 8000 के स्तर से केवल 100 रुपये ही दूर है और विशेषज्ञों के अनुसार अगर भाव 8000 के अहम स्तर को तोड़ ऊपर निकलता है तो कीमतें 9000 के आंकड़े को भी पार कर सकती हैं। इस तेजी के पीछे दो कारण हैं जैसे घरेलू बाजार में बढ़ती सोया DOC की मांग और सोयाबीन के स्टॉक में आई कमी है। स्टॉक के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में सोयाबीन की आवक घटकर मात्र 4 लाख टन रही। अक्टूबर से अप्रैल तक कुल आवक 67.5 लाख टन, पिछले वर्ष की तुलना में 13% कम, वहीं अगर क्रशिंग की बात करें तो अकेले अप्रैल में 9 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग हुई है और अक्टूबर से अप्रैल के बीच कुल 65.5 लाख टन सोयाबीन क्रश किया गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में 7% कम है, जिसके चलते अप्रैल के आखिर में कुल सोयाबीन का स्टॉक 43.81 लाख टन ही बचा है जो पिछले साल के इसी समय के मुकाबले 19% कम है। आगे की बात करें तो मौसम विभाग के अनुसार अगले सप्ताह से मानसून दस्तक दे सकता है और जून के मध्य से सोयाबीन की बुवाई शुरू हो जाएगी, जिसके बाद कीमतों का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि बुवाई कितनी तेजी से हो रही है। वैसे मौजूदा ऊंचे दामों को देखकर लगता है कि इस साल किसान सोयाबीन की बुवाई बढ़ा सकते हैं और अगर जून के मध्य के बाद बुवाई के आंकड़े ज्यादा निकलकर आते हैं, तो इससे कीमतों पर थोड़ा दबाव बन सकता है। हालांकि, फिलहाल मंडियों में माल की कम आवक और तगड़ी मांग की वजह से बाजार का माहौल पूरी तरह मजबूत बना हुआ है। हमारा मानना है कि कीर्ति प्लांट पर भाव 7900 पर पहुंच चुका है और अभी 100 से 150 की तेजी आने की और उम्मीद दिख रही है, अगर प्लांट पर भाव 8000 के ऊपर निकलता है तो तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है लेकिन उससे पहले 8000 का स्तर तोड़ना जरूरी है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।