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जून महीने में गेहूं बाजार की चाल कैसी रह सकती है

किसान और व्यापारी भाइयों, गेहूं बाजार में इस सप्ताह भी माहौल काफी शांत रहा और भावों में कोई बड़ी हलचल देखने को नहीं मिली। ज्यादातर मंडियों में गेहूं के दाम सीमित दायरे में ही घूमते रहे। दिल्ली मंडी में पूरे सप्ताह भाव ₹2680 प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। वहीं कुछ मंडियों में हल्का दबाव देखने को मिला। नजफगढ़ मंडी में ₹15 की गिरावट के साथ भाव ₹2500 पर आ गए, नरेला मंडी में ₹30 टूटकर ₹2650 रह गया, गुलाबबाग (पूर्णिया) मंडी ₹10 मंदी के साथ ₹2530 पर पहुंच गई और बूंदी मंडी में मिल क्वालिटी गेहूं ₹30 घटकर ₹2440 प्रति क्विंटल बिकता रहा। हैदराबाद बाजार में भी नरमी बनी रही, जहां मध्य प्रदेश लाइन गेहूं ₹30 घटकर ₹2780 और महाराष्ट्र लाइन ₹40 टूटकर ₹2830 पर आ गई।

कोलकाता बाजार में भी ₹50 की गिरावट दर्ज हुई और भाव ₹2725 प्रति क्विंटल रह गए। दूसरी तरफ हरियाणा की सिवानी मंडी ₹2510 और चरखी दादरी मंडी ₹2550 पर बिना किसी बदलाव के कारोबार करती रहीं। हालांकि बाजार पूरी तरह कमजोर भी नहीं रहा। कुछ मंडियों में मांग निकलने से भावों को थोड़ा सहारा मिला। शाहजहांपुर मंडी में गेहूं ₹6 बढ़कर ₹2451, हरदोई मंडी में ₹5 की तेजी के साथ ₹2450 और दाहोद मंडी में मिल क्वालिटी गेहूं ₹25 मजबूत होकर ₹2500 प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सबसे अच्छी तेजी गोरखपुर मंडी में देखने को मिली, जहां गेहूं के भाव ₹70 उछलकर ₹2480 से सीधे ₹2550 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। कुल मिलाकर देखा जाए तो गेहूं बाजार अभी भी एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

बड़े स्तर पर न तो खरीदारी का दबाव दिख रहा है और न ही बिकवाली का, इसलिए भाव फिलहाल स्थिर से लेकर हल्की तेजी-मंदी के बीच बने हुए हैं। गेहूं की सरकारी खरीद और उत्पादन आंकड़े पर नजर डाले तो केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने तीसरे अग्रिम अनुमान में 2025-26 के रबी सीजन के दौरान देश में गेहूं का कुल उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 1206.60 लाख टन के सर्वकालीन उच्च स्तर पर पहुँचने की उम्मीद जताई है, जो कि 2024-25 सीजन के 1179.40 लाख टन के संशोधित उत्पादन से कहीं ज्यादा है। इस बार गेहूं की रिकॉर्ड बुआई होने की वजह से सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की इतनी भारी आवक हुई है कि सरकार को अपनी खरीद का टारगेट बार-बार बढ़ाना पड़ रहा है; शुरुआत में केन्द्रीय पूल के लिए 303 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था, जिसे दूसरे चरण में 42 लाख टन बढ़ाकर 345 लाख टन और तीसरे चरण में 1 लाख टन और बढ़ाकर 346 लाख टन तय किया गया था। अब इसमें चौथे चरण की बढ़ोतरी का इंतजार है क्योंकि तय लक्ष्य को पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद अभी भी चल रही है। मध्य प्रदेश में तो खरीद अपने लक्ष्य को भी पार कर चुकी है, जिसके बारे में वहाँ के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को बताया कि राज्य सरकार ने इस साल अब तक किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है; कुल मिलाकर 26 मई तक देशभर में गेहूं की सरकारी खरीद 345.40 लाख टन पर पहुँच गई है, जो कि 345 लाख टन के तय लक्ष्य से भी 40 हजार टन अधिक है। आगे की तेजी मंदी पर चर्चा करे तो देश भर के मिलर्स की तरफ से मांग कमजोर होने और किसी भी बड़ी खरीदारी के अभाव में फिलहाल गेहूं के दाम थमे हुए हैं, बल्कि कुछ बाजारों में तो हल्की नरमी भी देखी गई है; इस सुस्ती के दो मुख्य कारण हैं – पहला यह कि आटा और मैदा जैसे गेहूं के उत्पादों की बिक्री कमजोर होने से मिलें अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं और उन्होंने गेहूं खरीदना कम कर दिया है, और दूसरा कारण यह है कि उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के बड़े मिलर्स के पास जुलाई तक की पिसाई के लिए पर्याप्त स्टॉक पहले से मौजूद है। इसके अलावा, बाजार को यह भी उम्मीद है कि सरकार जुलाई से OMSS योजना के तहत गेहूं की बिक्री शुरू कर सकती है, जिसकी वजह से व्यापारियों ने अपनी खरीद धीमी कर दी है; हालांकि OMSS आने से बाजार में कोई बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है, पर बाजार आगे बढ़ेगा या घटेगा,

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार गेहूं बेचने की क्या कीमत तय करती है, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार गेहूं की बिक्री दर ₹2550 से ऊपर रखती है, तो बाजार में ₹25 से ₹50 प्रति क्विंटल तक का सुधार देखने को मिल सकता है। यानी के गेहूं का बाजार जून महीने में भी इसी दायरे में घूमता नजर आ सकता है बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।

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