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सरसो के भाव ने छुआ 9000 का स्तर अब आगे और कितनी तेजी

किसान और व्यापारी भाइयों कल सरसों के बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला जहां सुबह बाजार 50 से 100 रुपये की तेजी के साथ खुला लेकिन शाम को ऊपरी स्तरों पर लेवाली सुस्त पड़ने से प्लांटों पर भाव 50 से 100 रुपये तक फिसल गए। कल सलोनी प्लांट में सरसों का भाव 100 रुपये तेज होकर 9000 को टच कर दिया, जैसा कि हमने आपको बताया भी था। शाम को लेवाली सुस्त पड़ने से 100 रुपये टूटकर वापस से 8900 पर पहुंचा अन्य प्लांटों की बात करे तो गोयल कोटा प्लांट में सरसों का भाव 200 रुपये की तेजी के साथ 8100 पर पहुंच गया। अडानी प्लांट पर सरसों का भाव 100 रुपये की तेजी के साथ 8100 पर खुला था लेकिन शाम को वापस से 100 रुपये घटकर 8000 पर रह गया। मंडियों पर नजर डालें तो जयपुर मंडी 8100 तेजी 50, भरतपुर मंडी 7775 तेजी 25, खैरथल मंडी में 7795 तेजी 95, मुरैना मंडी 7750 तेजी 50 और गोहाना मंडी में सरसों का भाव 7121 रहा, तेजी 50 रुपये की दर्ज की गई। सरसों को टेक्निकल चार्ट के नजरिये से देखें तो पिछले एक महीने से बाजार एक ही ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। बाजार घट-बढ़ के साथ हर हफ्ते 200 से 300 रुपये तेज होता जा रहा है।

दरअसल पहले बाजार में 200 से 300 तक की तेजी बनती है और उसके बाद 100 से 150 तक की मुनाफावसूली होती है और उसके बाद बाजार फिर से 200 से 300 तक तेज होता है और उसके बाद फिर 100 से 150 का करेक्शन आता है। बाजार इसी ट्रेंड को फॉलो कर रहा है और आगे भी इसी ट्रेंड को फॉलो करता रहेगा। एक तरह से देखा जाए तो इस ट्रेंड से बाजार में मजबूत तेजी आ रही है जिससे जोखिम कम हो गया है। कल तेल मिलों की अच्छी खरीद के चलते सरसों तेल की कीमतों में भी 1 से 2 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। उत्पादन और स्टॉक की बात करें तो ‘मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी’ के अनुसार साल 2025-26 के लिए सरसों के उत्पादन का अनुमान 117.25 लाख टन से घटाकर अब 114.25 लाख टन कर दिया गया है, और यदि इसमें पिछले सीजन के बचे हुए 4 लाख टन के स्टॉक को भी जोड़ दिया जाए, तो बाजार में कुल उपलब्ध सरसों 118.25 लाख टन आंकी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से मई के दौरान मंडियों में हुई 55 लाख टन की आवक के मुकाबले 44 लाख टन सरसों की क्रशिंग (पेराई) हो चुकी है, जो इसकी मजबूत खपत को दर्शाता है; वहीं 31 मई 2026 तक किसानों के पास अभी भी 61.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ है। इसके अलावा, वा, तेल मिलों (प्रोसेसर) और स्टॉकिस्टों के पास 12.50 लाख टन माल है, जबकि नैफेड और हैफेड (NAFED/HAFED) जैसी सरकारी संस्थाओं के पास सिर्फ 0.50 लाख टन का ही स्टॉक रह गया है; इस तरह बाजार में कुल उपलब्ध स्टॉक 74.25 लाख टन बैठता है और सरकार का हिस्सा लगभग ना के बराबर (नगण्य) हो चुका है। इसे पिछले साल से कंपेयर करें तो इस समय सरसों का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले लगभग 11% कम है। अगर राज्यों के हिसाब से देखें, तो राजस्थान 54.25 लाख टन सरसों की पैदावार के साथ देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बना हुआ है, जबकि इसके बाद उत्तर प्रदेश में 19 लाख टन और पंजाब-हरियाणा में 13.50 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। अब आवक भी धीरे-धीरे घटकर 7 से 6.5 लाख बोरी की रेंज में आ चुकी है। आयातित तेलों के ऊंचे भाव होने और सरसों के स्टॉक में गिरावट के चलते बाजार में बड़ी मंदी की गुंजाइश नहीं दिख रही है। अब तेल में ग्राहकी थोड़ी सुस्त हो गई है और ऊपर से सरसों खल की मांग भी सीमित होती नजर आ रही है, जिससे मौजूदा स्तरों से 100-150 की गिरावट (मुनाफावसूली) आ सकती है; जिसके बाद बाजार में फिर से तेजी देखने को मिलेगी। इसीलिए 100-200 रुपये की गिरावट आने पर घबराएं नहीं, माल को पकड़ कर बने रहें। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।

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