क्या मक्का के बाजार में गिरावट दौर ऐसे ही जारी रहेगा – किसान और व्यापारी भाइयों, मक्का का बाजार 10-20 रुपये करके रोजाना नीचे जाता जा रहा है। पिछले एक हफ्ते में ही 50 से 60 रुपये तक की गिरावट आ चुकी है। महाराष्ट्र लाइन पर मक्का बाजार में फिलहाल सुस्ती का माहौल है, जिसके चलते सिमरन धुले प्लांट में भाव गिरकर ₹1925 प्रति क्विंटल रह गए हैं और पिछले कुछ दिनों से प्लांटों ने खरीदारी भी लगभग बंद कर दी है। महाराष्ट्र के नाशिक और औरंगाबाद जिलों में आवक का भारी दबाव बना हुआ है, जहाँ नाशिक, मालेगाँव और मनमाड़ जैसी मंडियों में रोजाना 250 से 300 ट्रैक्टर पहुँच रहे हैं। यह स्थिति अगले एक-डेढ़ महीने तक जारी रहने की उम्मीद है, जिससे मंडियों में लूज मक्के का व्यापार ₹1500 से ₹1800 के बीच हो रहा है। मध्य प्रदेश लाइन में भी नरमी का रुख है, जहाँ तिरुपति स्टार्च प्लांट पर कीमतें गिरकर ₹1770 पर आ गई हैं, जबकि खरगोन मंडी में भाव ₹1510 से ₹1700 के दायरे में स्थिर हैं; हालाँकि वहाँ भी कल 200-250 वाहनों की अच्छी आवक देखी गई।
बाजार में इस समय मक्के की एक्सपोर्ट और लोकल डिमांड दोनों ही काफी सुस्त चल रही हैं, और पोल्ट्री व एथेनॉल सेक्टर से भी कोई खास सपोर्ट नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालाँकि जानकारों का मानना है कि अगर अगले महीने मांग निकलती है, तो अच्छी क्वालिटी वाले मक्के के भाव में ₹50 तक का मामूली सुधार हो सकता है, लेकिन औसत क्वालिटी की कीमतों में तेजी की कोई उम्मीद नहीं है। इसके अलावा, जल्द ही रबी सीजन की नई फसल की आवक शुरू होने वाली है और जलगाँव जैसे जिलों में इस बार मक्के की बुवाई भी बढ़ गई है, जिससे बाजार में सप्लाई और बढ़ेगी। व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक निर्यात की समस्याओं का समाधान नहीं होता और घरेलू मांग में मजबूती नहीं आती, तब तक मक्के की कीमतों में किसी बड़े सुधार की गुंजाइश कम ही नजर आ रही है। कुल मिलाकर, कमजोर निर्यात के साथ-साथ एथेनॉल, स्टार्च और पोल्ट्री फीड जैसे प्रमुख क्षेत्रों से घरेलू मांग सुस्त होने के कारण फिलहाल मक्का बाजार पर दबाव बना रहेगा। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे