किसान और व्यापारी भाइयों, प्राइवेट सेक्टर के पास पहले से ही गेहूं का भरपूर स्टॉक होने और बाजार में कीमतें स्थिर बनी रहने के कारण, फ्लोर मिलर्स और प्रोसेसर्स सरकारी गेहूं खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के जरिए गेहूं की नीलामी शुरू तो कर दी है, लेकिन खरीदारी के प्रति बाजार का रुख काफी सुस्त है और फिलहाल इसमें कोई खास रिस्पांस या सक्रियता देखने को नहीं मिल रही है। खाद्य मंत्रालय ने इस वित्त वर्ष के लिए OMSS योजना के तहत 30 लाख टन गेहूं बेचने का कोटा तय किया है, लेकिन अब तक इसमें से केवल 3.50 लाख टन गेहूं की ही बिक्री हो पाई है।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इस बार सरकारी गेहूं की बिक्री की शुरुआत काफी देरी से, यानी नवंबर 2025 में की थी, जिसमें दो बार साप्ताहिक नीलामी तो हुई पर सीमित बिक्री के कारण इसे बाद में रोक दिया गया था। इसके बाद दिसंबर में भी एक बार फिर से नीलामी आयोजित की गई और अब जनवरी 2026 में इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया है। जनवरी महीने में अब तक दो नीलामी हुई हैं पहली नीलामी 14 जनवरी को हुई जिसमें 90 प्रतिशत माल बिका और बिडिंग (Bidding) भी ऊँची लगी थी, लेकिन परसों 21 जनवरी को हुई नीलामी में अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। इस नीलामी में 82 प्रतिशत माल ही बिक पाया है और पिछली नीलामी की तुलना में इस बार बिडिंग भी 50 से 100 रुपये तक नीचे लगी है, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा है। इसी कारण इन एक-दो दिनों में ही गेहूं का बाजार 40 से 50 रुपये तक टूट चुका है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकारी योजना (OMSS) के तहत गेहूं की साप्ताहिक ई-नीलामी मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह तक जारी रह सकती है, लेकिन फ्लोर मिल मालिकों और प्रोसेसर्स द्वारा इसमें बहुत ज्यादा दिलचस्पी दिखाने की उम्मीद कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं का भाव फिलहाल स्थिर है और वहां स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है साथ ही स्टॉक लिमिट का नियम भी अभी लागू है। सरकार ने OMSS के तहत होने वाले गेहूं की नीलामी का न्यूनतम आरक्षित मूल्य ₹2550 प्रति क्विंटल तय किया है, जिस पर अलग से किराया-भाड़ा भी जुड़ेगा, इसलिए कुछ गिने-चुने राज्यों के खरीदार ही इसमें रुचि दिखा सकते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष के लिए आवंटित 30 लाख टन के कोटे में से भारतीय खाद्य निगम (FCI) लगभग 10-12 लाख टन गेहूं ही बेच पाएगा। कुल मिलाकर, गेहूं का बाजार 50 से 75 रुपये की तेजी-मंदी के एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे