किसान और व्यापारी भाइयों, कुछ ही दिनों में सरसों का भाव 7000 रुपये से भी नीचे आ गया है। 14 फरवरी को जयपुर मंडी में सरसों का भाव 7050 रुपये था और कीमतें गिरते-गिरते कल जयपुर मंडी में सरसों का भाव 6800/6850 रुपये पर आ गया है। हालाँकि, पिछले कुछ दिनों में आई गिरावट के बाद कल 25 से 50 रुपये की रिकवरी देखने को मिली है। कल भरतपुर मंडी में नई सरसों का भाव 6351 रुपये बोला गया है। भरतपुर क्षेत्र में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने सरसों की खेती को काफी नुकसान पहुँचाया है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। हवा के जोर से जहाँ खेतों में खड़ी फसलें नीचे गिर गई हैं (आड़ी पड़ गई हैं), वहीं कटी हुई फसलें भी पानी में भीग गई हैं। इस बारिश की वजह से खड़ी सरसों की फलियों में गलन बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है। अब किसानों की नजरें मौसम पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में तेज धूप निकलने और तापमान बढ़ने की संभावना है, जिससे खेतों की स्थिति और फसलों की रिकवरी पर असर पड़ेगा।
अब बाजार में नई सरसों की आवक बढ़ने लगी। है और इसका असर कीमतों पर साफ तौर पर देखा जा रहा है। कल सम्पूर्ण भारत में सरसों की कुल आवक 4.25 लाख बोरी दर्ज की गई है, जिसमें से नई आवक 3.50 लाख बोरी की हुई है। नई आवक के मार्केट में आने से सरसों तेल और खल की कीमतों में गिरावट आई है। अगर सरसों तेल की कीमतें 1400 रुपये से नीचे फिसलती हैं, तो अगला मजबूत सपोर्ट 1360 रुपये का है; फिलहाल सरसों तेल की कीमतें भी 1370 से 1400 रुपये प्रति 10 किलो तक चल रही हैं। डिमांड के अनुसार सप्लाई बनी रहने की वजह से फिलहाल 50-100 रुपये से बड़ी तेजी आने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अगर जयपुर मंडी में सरसों का भाव 6775 के स्तर के नीचे जाता है, तो कीमतों में गिरावट और बढ़ सकती है और भाव 6450 रुपये तक जा सकता है। कुल मिलाकर सरकारी बिकवाली, नई फसल के आने और पक्के माल (तेल-खल) की सुस्त मांग के चलते फिलहाल कीमतों पर दबाव बना रहने की संभावना है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि मार्च के मध्य तक, जब आवक अपने चरम पर होगी, तब जाकर बाज़ार में गिरावट थमने की उम्मीद है। इसीलिए अगर आप सरसों को स्टॉक करने की सोच रहे हैं, तो खरीद के लिए मार्च के मध्य तक इंतजार करें ताकि आपको कम से कम कीमत पर सरसों मिल सके और आगे चलकर भाव बढ़ने पर आप अच्छा मुनाफा कमा सकें। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे बाकि व्यापार अपने विवेक से करे
भारत अमेरिका को करेगा 5 हजार टन बासमती चावल के निर्यात
किसान और व्यापारी भाइयों, सोयाबीन के बाजार में अब तेजी-मंदी एक सीमित दायरे में बनी हुई है; कभी बाजार हल्का तेज हो जाता है और कभी हल्की मंदी आ जाती है। बाजार अब एक ऐसे मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है जहाँ आगे का रुझान सरकारी नीलामी और मांग तय करेगी कि भाव नीचे की तरफ जाएगा या ऊपर की तरफ जाएगा । मार्केट के रुझान पर नजर डालें तो पिछले दो-तीन दिनों से कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है भाव में 25 से 50 रुपये तक की ही घट-बढ़ हो रही है। कल संपूर्ण भारत में सोयाबीन की कुल आवक 1,95,000 बोरी की हुई है। इस समय आवक तो कमजोर चल रही है, लेकिन मांग सुस्त होने से तेजी की तरफ रुझान कमजोर पड़ गया है। ऊपर से मार्केट में सरकार ने भी एंट्री ले ली है और सोयाबीन की सरकारी बिकवाली शुरू कर दी है। फिलहाल यह नीलामी NCCF के माध्यम से मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में ही शुरू की गई है। अगर कीमत की बात करें तो NCCF ने 5000 से 5100 रुपये के बीच सोयाबीन बेची है। फिलहाल नीलामी की मात्रा कम होने की वजह से इसका असर कीमतों पर नहीं पड़ा है, लेकिन आगे चलकर अगर सरकार नीलामी की मात्रा बढ़ाती है, तो कीमतों पर असर जरूर देखने को मिल सकता है। साथ ही बाजार में यह भी चर्चा चल रही है कि होली के बाद से नाफेड (NAFED) भी सोयाबीन की नीलामी शुरू कर सकती है। डिमांड की तरफ देखें तो घरेलू बाजार में सोया डीओसी (DOC) की मांग दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों से मिल रही कड़ी टकर के कारण निर्यात में भी गिरावट आई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन की सप्लाई बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर फिलहाल तो सोयाबीन का बाजार कुछ दिनों के लिए 50 से 100 रुपये की घट-बढ़ के सीमित दायरे में रहने की संभावना है। अगर आगे चलकर मांग और घटती है और सरकार नीलामी की मात्रा को बढ़ा देती है, तो कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे
मक्का की निर्यात डिमांड से ही कीमतों को मिल सकता है सहारा
किसान और व्यापारी भाइयों, मक्का का बाजार मंदी के दलदल में फंसता ही जा रहा है और ऊपर से मध्य प्रदेश में मक्का की नई फसल की आवक भी शुरू हो गई है। कल मध्य प्रदेश की खरगोन मंडी में 10 वाहन नए मक्का और 25 वाहनों पुराने मक्का की आवक हुई है। बताया जा रहा है कि नए मक्का का भाव 1150 से 1250 रुपये के दायरे में रहा और इसमें नमी लगभग 35% तक बताई जा रही है। वहीं पुराने मक्के की बात करें तो मंडी में भाव 1450 से 1620 रुपये के दायरे में स्थिर बना हुआ है। मंडी के व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवक और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ेगा। छिंदवाड़ा मंडी की बात करें तो कल A+ ग्रेड मक्का 1600 रुपये, A ग्रेड मक्का 1580 रुपये और B+ ग्रेड मक्का 1550 रुपये पर स्थिर रहा। महाराष्ट्र लाइन की मंडियों में कल सांगली मंडी में भाव 1850/1975 रुपये, धुले मंडी में 1500 रुपये और सह्याद्रि स्टार्च पर 1800 रुपये पर कीमतें स्थिर बनी रहीं।
मक्का बाजार का रुख इस समय स्थिर से मंदी की तरफ बना हुआ है, जिसके पीछे कई कारण हैं। एथेनॉल, स्टार्च और फीड सेक्टर की मांग सीमित चल रही है और यही वजह है कि मक्का की मांग से अधिक सप्लाई बनी हुई है। एथेनॉल कंपनियां और पोल्ट्री सेक्टर अपनी जरूरत के हिसाब से ही सीमित खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में स्टॉकिस्ट भी सक्रिय नहीं हैं क्योंकि कीमतें लगातार गिर रही हैं; जब तक गिरावट नहीं थम जाती, उनका सक्रिय होना मुश्किल है। इसके अलावा, जब तक मक्का की निर्यात (एक्सपोर्ट) मांग शुरू नहीं होती, तब तक कीमतों में सुधार आना कठिन है। बांग्लादेश में आंतरिक सरकारी अड़चनों की वजह से निर्यात ठप पड़ा है। वहां चुनाव हो चुके हैं, पर अभी तक मांग नहीं निकली है। हमारा मानना है कि जब तक मक्का की निर्यात डिमांड नहीं आती, तब तक बाजार इसी स्थिति में बना रहेगा और कीमतें धीरे-धीरे नीचे जाती रहेंगी। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे