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सरसों के बाजार ने एक दिन में लगाई 350 रुपए तक छलांग

चरखी दादरी मंडी में देखा गया, जहाँ सुबह बाजार ₹150 की तेजी के साथ खुला था और शाम तक ₹200 और तेज होकर सरसों का भाव ₹7900 के स्तर पर पहुंच गया; वहीं दूसरी तरफ जयपुर मंडी में सरसों के भाव ने ₹125 की छलांग लगाई और भाव ₹8050 पर पहुंच गया, जो कि पिछले चार सालों का उच्चतम स्तर है क्योंकि ऐसा भाव पिछली बार फरवरी 2022 में देखा गया था। अन्य मंडियों और प्लांटों पर नजर डालें तो भरतपुर मंडी में ₹100 की तेजी के साथ भाव ₹7600 रहे, जबकि सुमेरपुर मंडी में सरसों ₹140 उछलकर ₹7920 तक पहुंच गई; साथ ही देई बूंदी और रेवाड़ी मंडी में भी ₹100 की मजबूती देखने को मिली, जहां भाव क्रमशः ₹7700 और ₹7300 दर्ज किए गए। इधर अलवर मंडी में बाजार ₹50 मजबूत होकर ₹7700 पर पहुंचा, जबकि खैरथल मंडी में ₹131 की अच्छी तेजी के साथ भाव ₹7651 रहे और सिवानी मंडी में 41 लैब सरसों ₹100 मजबूत होकर ₹7800 पर कारोबार करती दिखाई दी। अगर तेल मिलों और प्लांटों की बात करें तो गोयल कोटा प्लांट ने ₹250 की तेजी का जबरदस्त प्रदर्शन दिखाया

जिससे वहां भाव ₹7950 पर पहुंच गया, वहीं सलोनी प्लांट में सरसों ₹125 मजबूत होकर ₹8850 तक पहुंच गई और पतंजलि प्लांट में भी ₹100 की तेजी दर्ज की गई जिससे वहां भाव ₹7750 के स्तर पर आ गए; यानी कुल मिलाकर कल सरसों का बाजार ₹100 से ₹200 तक तेज रहा और आगे भी इसमें बढ़त का माहौल बना हुआ है। सरसों के बाज़ारों में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है, जिसे इस समय सबसे बड़ा सहारा सरसों तेल और खल के बाजार में आ रहे लगातार सुधार से मिल रहा है और खास बात यह है कि सरसों तेल की मजबूती अब बाकी अन्य खाद्य तेलों के मुकाबले ज्यादा तेज होती दिख रही है। जैसा कि कुछ हफ्ते पहले ही संकेत दे दिए गए थे कि आने वाले समय में सरसों तेल, सोया तेल और पाम तेल से भी ऊंचे दामों (प्रीमियम) पर बिक सकता है, बाजार अब बिल्कुल उसी तरफ बढ़ता नजर आ रहा है, जहाँ सोया तेल तो फिलहाल एक सीमित दायरे में अटका हुआ है पर सरसों तेल लगातार मजबूत होता जा रहा है। व्यापार जगत में अब तो यहाँ तक संभावना जताई जा रही है कि सरसों तेल और सोया तेल के बीच का यह अंतर बढ़कर ₹15 से ₹18 प्रति किलो तक पहुँच सकता है, और बाजार के इसी मजबूत मिजाज को देखते हुए जो सरसों तेल इस समय ₹1550 से ₹1580 प्रति क्विंटल की रेंज में चल रहा है, उसके आगे ₹1640 से ₹1650 प्रति क्विंटल तक पहुँचने की संभावना है। सरसों बाजार की सबसे बड़ी ताकत इसकी कमजोर सप्लाई और किसानों व स्टॉकिस्टों की मजबूत पकड़ बनती जा रही है, क्योंकि उनके पास मौजूद माल फिलहाल सुरक्षित हाथों में है और दाम गिरने पर भी वे बेचने के लिए जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं,

यही वजह है कि बाजार में आने वाली हर छोटी गिरावट पर लिवाली (खरीद) तुरंत शुरू हो जाती है आवक की बात करें तो इस हफ्ते के शुरुआत में ऑल इंडिया आवक 8.5 लाख बोरी की चल रही थी जो कल तक घटकर 6.5 लाख बोरी पर रह गई है और आगे धीरे-धीरे इसमें और गिरावट आने की संभावना है। दूसरी तरफ, तेल मिलों की मांग लगातार बनी हुई है और सरसों खल की भी अच्छी मांग देखने को मिल रही है, जिससे खल और तेल दोनों से मिल रहा मजबूत सहारा सरसों के मुख्य बाजार को लगातार तेजी दे रहा है। वर्तमान हालातों को देखते हुए आने वाले समय में सरसों के भाव में ₹200 से ₹300 प्रति क्विंटल तक की और तेजी आने की संभावना है और साफ तौर पर कहें तो इसमें कोई बड़ी मंदी नजर नहीं आ रही है; हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली से मामूली उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, जिसे नई खरीदारी का एक अच्छा मौका समझा जा सकता है, जहाँ जयपुर मंडी में सरसों का नया टारगेट अब ₹8250 का है और इसके ऊपर टिकने पर यह ₹8650 तक भी जा सकता है, जबकि नीचे में इसका मजबूत सपोर्ट स्तर ₹7600 माना जा रहा है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।

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